उन्होंने कहा, "इंडोनेशिया के स्थाई राजदूत ने हमें सूचित किया कि मसूद अज़हर को विश्व में आतंक फैलाने वाले शख़्स के तौर पर मान्यता दे दी है. यह
हमारे लिए महत्वपूर्ण परिणाम है क्योंकि भारत कई सालों से इसकी कोशिश करता
रहा है."
"भारत ने पहली बार 2009 में इसकी कोशिश की थी लेकिन हमने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी कोशिशें जारी रखीं और आज इसे पा लिया है. इस कोशिश में साथ देने के लिए अमरीका, ब्रिटेन समेत उन सारे देशों का धन्यवाद जो परिषद के अंदर और बाहर हैं. साथ ही साथ यह दिन उन लोगों के लिए बहुत ख़ास है जो आतंकवाद के लिए ज़ीरो टॉलरेंस चाहते हैं."
इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एएनआई से बातचीत में कहा है कि मसूद अज़हर को 'वैश्विक आतंकी' घोषित किए जाने का मक़सद पूरा हो पाया इसको लेकर वह ख़ुश हैं.
मसूद अज़हर के चरमपंथी समूह को भारत कई हमलों के लिए ज़िम्मेदार मानता है.
भारत सरकार बीते कई साल से मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने के लिए अलग-अलग मोर्चों पर कूटनीति का प्रयोग करती रही है. लेकिन हाल ही में पुलवामा हमले के बाद इन कोशिशों ने फिर ज़ोर पकड़ा था.
भारत मानता है कि पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले के पीछे मसूद अज़हर के संगठन का ही हाथ था. इस हमले में भारतीय सुरक्षा बल के कम से कम 40 जवान मारे गए थे.
हाल ही में भारत में मसूद अज़हर को आतंकवादी घोषित करने की कोशिशों को फिर बल मिला था, जब ब्रिटेन के उच्चायुक्त डोमिनिक एस्क्वॉथ ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आंतकियों की सूची में मसूद अज़हर को शामिल किया जाएगा इसको लेकर वह 'आशावादी' हैं.
इससे पहले अमरीकी विदेश मंत्रालय ने भी भारत के पक्ष में बयान दिया था. मंत्रालय के उप प्रवक्ता रॉबर्ट पालाडिनो ने कहा था, "इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने में अमरीका और चीन के साझे हित हैं और अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित नहीं किया जाता है तो ये इस क्षेत्र की शांति के ख़िलाफ़ होगा."
संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंधित किए गए किसी शख़्स को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कोई भी सदस्य देश अपने यहां शरण नहीं दे सकता. साथ ही, ऐसे व्यक्ति के आर्थिक लेन-देन पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.
वैसे आप ने येति के पांवों के निशान देखे हों या नहीं, आप हिममानव की कल्पना बड़ी आसानी से कर सकते हैं. उसे देखें तो पहचान भी सकते हैं. बहुत सी फ़िल्मों, टीवी सिरीज़ और वीडियो गेम में येति के किरदार देखने को मिले हैं. इनमें डॉक्टर व्हू, टिनटिन और मॉन्स्टर इन्क. जैसी फ़िल्में शामिल हैं.
क़िस्से-किंवदंतियों का किरदार येति एक विशालकाय, झबरे बालों वाला जीव माना जाता है, जो कुछ इंसानों और कुछ विशालकाय बंदरों से मिलता है. इसके बड़े-बड़े पैर होने से लेकर बड़े और डरावने दांत होने तक की कल्पना की गई है. माना जाता है कि येति अक्सर हिमालय के बर्फ़ से ढंके इलाक़ों में अकेले घूमता है. ये इंसान के विकास के हिंसक दौर का प्रतीक है.
पर, सवाल ये है कि अक्सर जिस येति के सबूत होने के दावे किए जाते हैं, वो क्या हक़ीक़त में होता भी है? या ये सिर्फ़ कोरी कल्पना भर है?
"भारत ने पहली बार 2009 में इसकी कोशिश की थी लेकिन हमने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी कोशिशें जारी रखीं और आज इसे पा लिया है. इस कोशिश में साथ देने के लिए अमरीका, ब्रिटेन समेत उन सारे देशों का धन्यवाद जो परिषद के अंदर और बाहर हैं. साथ ही साथ यह दिन उन लोगों के लिए बहुत ख़ास है जो आतंकवाद के लिए ज़ीरो टॉलरेंस चाहते हैं."
इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एएनआई से बातचीत में कहा है कि मसूद अज़हर को 'वैश्विक आतंकी' घोषित किए जाने का मक़सद पूरा हो पाया इसको लेकर वह ख़ुश हैं.
मसूद अज़हर के चरमपंथी समूह को भारत कई हमलों के लिए ज़िम्मेदार मानता है.
भारत सरकार बीते कई साल से मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने के लिए अलग-अलग मोर्चों पर कूटनीति का प्रयोग करती रही है. लेकिन हाल ही में पुलवामा हमले के बाद इन कोशिशों ने फिर ज़ोर पकड़ा था.
भारत मानता है कि पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले के पीछे मसूद अज़हर के संगठन का ही हाथ था. इस हमले में भारतीय सुरक्षा बल के कम से कम 40 जवान मारे गए थे.
हाल ही में भारत में मसूद अज़हर को आतंकवादी घोषित करने की कोशिशों को फिर बल मिला था, जब ब्रिटेन के उच्चायुक्त डोमिनिक एस्क्वॉथ ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आंतकियों की सूची में मसूद अज़हर को शामिल किया जाएगा इसको लेकर वह 'आशावादी' हैं.
इससे पहले अमरीकी विदेश मंत्रालय ने भी भारत के पक्ष में बयान दिया था. मंत्रालय के उप प्रवक्ता रॉबर्ट पालाडिनो ने कहा था, "इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने में अमरीका और चीन के साझे हित हैं और अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित नहीं किया जाता है तो ये इस क्षेत्र की शांति के ख़िलाफ़ होगा."
संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंधित किए गए किसी शख़्स को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कोई भी सदस्य देश अपने यहां शरण नहीं दे सकता. साथ ही, ऐसे व्यक्ति के आर्थिक लेन-देन पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.
येति या हिममानव एक बार फिर
सुर्ख़ियों में है. भारतीय सेना ने दावा किया है कि उसकी पर्वतारोही टीम ने
नेपाल में मकालू बेस कैंप के पास येति के पैरों के निशान देखे हैं. सेना ने ट्विटर हैंडल पर इसकी कुछ तस्वीरें भी जारी की हैं.
हिमालय की गोद
में हिममानव या येति देखने का ये कोई पहला दावा नहीं. पिछली एक सदी में कई बार ऐसे दावे किए गए हैं. येति या हिममानव का क़िस्सा उससे भी पुराना है.वैसे आप ने येति के पांवों के निशान देखे हों या नहीं, आप हिममानव की कल्पना बड़ी आसानी से कर सकते हैं. उसे देखें तो पहचान भी सकते हैं. बहुत सी फ़िल्मों, टीवी सिरीज़ और वीडियो गेम में येति के किरदार देखने को मिले हैं. इनमें डॉक्टर व्हू, टिनटिन और मॉन्स्टर इन्क. जैसी फ़िल्में शामिल हैं.
क़िस्से-किंवदंतियों का किरदार येति एक विशालकाय, झबरे बालों वाला जीव माना जाता है, जो कुछ इंसानों और कुछ विशालकाय बंदरों से मिलता है. इसके बड़े-बड़े पैर होने से लेकर बड़े और डरावने दांत होने तक की कल्पना की गई है. माना जाता है कि येति अक्सर हिमालय के बर्फ़ से ढंके इलाक़ों में अकेले घूमता है. ये इंसान के विकास के हिंसक दौर का प्रतीक है.
पर, सवाल ये है कि अक्सर जिस येति के सबूत होने के दावे किए जाते हैं, वो क्या हक़ीक़त में होता भी है? या ये सिर्फ़ कोरी कल्पना भर है?
Comments
Post a Comment