यहां कश्मीर पर हुकूमत कर चुके एक सुल्तान युसूफ़ शाह चक अपनी क़ ब्र में आराम फ़रमा रहे हैं. बदरंग हो चुकी चार दीवारी से घिरी इस क़ब्र के पास बरसात में उग आई हरी घास, चरती गाय और बकरियां इसकी बदहाली बयान कर रही हैं. ऐसा लगता है कि एक विशाल मैदान में एक नाउम्मीद बादशाह तन्हा खड़ा अपनी ज़िंदगी के क़िस्से सुना रहा है. और जिसे सुनने को कोई तैयार नहीं. ये मुग़लों के कश्मीर पहुंचने से पहले की बात है. तब कश्मीर एक ख़ुदमुख़्तार रियासत हुआ करती थी और युसूफ़ शाह चक उसके आख़िरी सुल्तानों में से एक. 1578 ईस्वी से 1586 ईस्वी तक कश्मीर पर हुकूम त करने वाले युसूफ़ शाह 'चक' वंश के शासक थे. 14 फ़रवरी 1586 को मुग़ल बादशाह अकबर ने उन्हें क़ैद किया और 30 महीने तक क़ैद में रखा. उसके बाद अकबर ने अपने सेनापति मानसिंह के सहायक के तौर पर युसूफ़ शाह चक को 500 म नसब (एक तरह का ओहदा) देकर नालंदा के बेशवक परगना में निर्वासित करके भेज दिया. सितंबर, 1592 में उनकी मौत हो गई. पटना स्थित ख़ुदा बक्श लाइब्रेरी के पूर्व निदेशक इम्तियाज़ अहमद बताते हैं, "युसूफ़ शाह का जि़क्र 'अकबरनामा', ...